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जाना है

क्या संवारे खुद को, कहाँ संवर कर जाना है

बेतरतीब है जहाँ भी जाना है बिखर जाना है!! 
इक  उम्र  से  सफर   मे  है,  थक  चुके है

जहाँ सुकुन दिखेगा अब वही उतर जाना है!! 
मुहब्बत, इश्क, प्यार ये अल्फाज़ ना कहो मुझसे

इक कल जो धुंधला हो गया है फिर निखर जाना है!!

क्यूँ

हम तुम्हें याद आय़े तो क्यूँ? 
हम  तुम्हें  भुलाये  तो  क्यूँ?? 
गम   है   ये   मिरे    अपने

मुझसे दूर ये जाये तो क्यूँ?? 
हंसते  मुस्कुराते   मेरे लब

मेरा  दर्द  तुम्हें बताये तो क्यूँ?? 
इश्क किया है खता नही, हम

दुनिया से नजरे चुराये तो क्यूं?? 
मेरे  खुदा  तो   तुम  हो,  हम

पत्थर को खुदा बताये तो क्यूँ?? 

थोडा और

इस खूबसूरत जख्म मे और जलाओ मुझे

थोडा  और थोडा  और याद आओ मुझे!!
खुश  सा  दिखने  लगा हूं  मै  फिर  से

इक  बार और याद  करके भुलाओ मुझे!! 
थोडी जान बाकी रह गयी है मिरे अंदर

इक    दफा      और      गिराओ    मुझे!! 
हुनर हासिल है तुमको तो भुल जाने का

यार  ये हुनर  थोडा तो  सिखाओ  मुझे!! 

देखकर तुझे

देखकर  तुझे  रूक  तुझ पर  नजर  गई

तू  निगाहों  के  रस्ते  दिल  मे उतर गई!!
मुखातिब   तुफानों  से  जब   से  हुई  है

कश्ती  तिरी   हुनर – मंदी   निखर  गई!! 

फलक से इश्क लड़ा बैठा था इक परिंदा, उम्र 

उसकी आधी पाने बाकी भुलाने मे गुजर गई!! 
नफरत के इश्तिहारों से भरे पडे थे अखबार 

खबर इक जो थी मुहब्बत की वो बेखबर गई!!

जुमले

वायदो की जबाने रवायत होती है 

जुमले तो शाहो की आदत होती है!! 
ये जो लोग जहर की खेती करते है

बातों मे  इनकी  सदाकत  होती  है!!